दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार को आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पर कथित हमले के मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
🗓️ घटना का सारांश
13 मई 2024 को, आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि जब वह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने उनके आधिकारिक निवास पर गई थीं, तब उनके निजी सचिव बिभव कुमार ने उनके साथ मारपीट की। मालीवाल के अनुसार, उन्हें कई बार थप्पड़ मारे गए और पेट, छाती और पेल्विक क्षेत्र में लात मारी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुमार ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।
📄 एफआईआर और गिरफ्तारी
मालीवाल की शिकायत के आधार पर, 16 मई को बिभव कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिनमें शामिल हैं:
- धारा 308: गैर इरादतन हत्या का प्रयास
- धारा 354: महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से हमला
- धारा 354B: महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला
- धारा 506: आपराधिक धमकी
- धारा 509: महिला की मर्यादा का अपमान
- धारा 341: गलत तरीके से रोकना
- धारा 201: अपराध के साक्ष्य को नष्ट करना
18 मई को, दिल्ली पुलिस ने बिभव कुमार को गिरफ्तार किया और उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।
🏥 चिकित्सीय रिपोर्ट
स्वाति मालीवाल की चिकित्सीय जांच में उनके बाएं जांघ, दाहिने गाल और आंख के नीचे चोट के निशान पाए गए।
⚖️ न्यायिक कार्यवाही
31 मई को, दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने बिभव कुमार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद, उनकी हिरासत को कई बार बढ़ाया गया, और अंततः 6 जुलाई को उनकी न्यायिक हिरासत 16 जुलाई तक बढ़ा दी गई।
📑 चार्जशीट और सबूत
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 50 से अधिक गवाहों के बयान शामिल हैं। पुलिस ने मुख्यमंत्री निवास से DVR और बिभव कुमार के मोबाइल फोन सहित कई डिजिटल उपकरण जब्त किए। जांच के दौरान, कुमार को उनके पुराने फोन से डेटा पुनः प्राप्त करने के लिए मुंबई भी ले जाया गया।
🧑⚖️ जमानत और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर 2024 को बिभव कुमार को जमानत दी, यह देखते हुए कि वह पहले ही 100 से अधिक दिनों से हिरासत में हैं और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। कोर्ट ने उन्हें 1 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती बॉन्ड पर रिहा किया, साथ ही यह शर्त रखी कि वह गवाहों को धमकाएंगे नहीं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
🔍 निष्कर्ष
स्वाति मालीवाल पर कथित हमले का मामला दिल्ली की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया है। इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से यह सुनिश्चित होगा कि न्याय प्रणाली में जनता का विश्वास बना रहे।


